अल्मोड़ा :: 1 अप्रैल को जीआईसी रैंगल में मनाया जाएगा चौथा ओण दिवस
अल्मोड़ा:: जंगल के दोस्त समिति ,शीतलाखेत द्वारा उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, देहरादून के सहयोग से चतुर्थ ओण दिवस का आयोजन आगामी 1अप्रैल को राजकीय इंटर कॉलेज, रैंगल में किया जा रहा है।
2022 को पहली बार ओण दिवस का आयोजन किया गया था, इसके तहत लोगों को खेतों व आस पास ओण जलाने(आड़ा फूंकने) के कार्यों को 31 मार्च तक पूरा कर लेने हेतु तैयार कर लिया जाता है ताकि 1 अप्रैल के बाद कोई ओण ना जलाए और लापरवाही से लगने वाली आग की घटनाओं को कम किया जा सके।
इस बार ओण दिवस में स्याहीदेवी-शीतलाखेत आरक्षित वन क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों की महिलाओं,जंगल के दोस्तों द्वारा प्रतिभाग किया जायेगा।
कार्यक्रम में प्रोफेसर दुर्गेश पंत, महानिदेशक उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, देहरादून तथा मुख्य विकास अधिकारी अल्मोड़ा दिवेश शासनी द्वारा प्रतिभाग किया जायेगा।
इसके अलावा नीहिर हिमालयन संस्थान, प्लस एप्रोच फाउंडेशन नई दिल्ली द्वारा भी कार्यक्रम में सहयोग किया जा रहा है।
वनाग्नि उत्तराखंड के जंगलों ,जल स्रोतों ,जैव विविधता के लिए सबसे बड़े खतरे के रूप में सामने आयी है एक बार जंगलों में आग आरंभ हो गई तो उस पर नियंत्रण पाने में बहुत समय और संसाधन लगाने पड़ते हैं ऐसे में आग लगे ही ना इस उद्देश्य को लेकर, ओण जलाने की परंपरा को समयबद्ध और व्यवस्थित करने हेतु वर्ष 2022 में कोसी नदी के प्रमुख जलागम क्षेत्र स्याहीदेवी-शीतलाखेत आरक्षित वन क्षेत्र के ग्राम सभा मटीला/ सूरी में 1 अप्रैल को जंगल के दोस्त समिति द्वारा प्रथम ओण दिवस का आयोजन किया गया।
उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने के कारणों में से 90% मामलों के पीछे ओण जलाने की घटनाओं में असावधानी पायी गई है। ओण दिवस मनाने के अच्छे परिणामों को देखते हुए वर्ष 2022 में पुष्कर सिंह धामी माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार द्वारा इसे शीतलाखेत मॉडल का नाम देते हुए इसे पूरे उत्तराखंड में लागू करने की घोषणा की।
ओण दिवस जंगलों को आग से सुरक्षित रखने का निरोधात्मक विचार है जिसमें सभी ग्राम वासियों से अनुरोध किया जाता है कि वो प्रत्येक वर्ष ओण/आङा/केङा जलाने की कार्रवाई 31 मार्च से पहले पूरी कर लें ताकि अप्रैल,मई और जून के महीनों में जब चीड़ में पतझड़ होने के कारण जंगलों में भारी मात्रा में पीरूल की पत्तियों जमा हो जाती हैं तापमान में वृद्धि होने तथा तेज हवाओं के कारण जंगल आग के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाते हैं,उस समय जंगलों को आग से सुरक्षित रखा जा सके। ओण दिवस का उद्देश्य जंगलों को आग से बचाकर उत्तराखंड के जल स्त्रोतों, जैवविविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित एवं संवर्धित करना है।