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राजधानी में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़े, सतर्क रहने की जरूरत

03:53 PM Mar 31, 2025 IST | उत्तरा न्यूज टीम
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मौसम के बदलाव के साथ फ्लू और वायरल संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ठंड पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, जिससे लोग अधिक बीमार पड़ रहे हैं। हाल ही में दिल्ली सहित कई राज्यों में स्वाइन फ्लू (H1N1 वायरस) के मामलों में वृद्धि देखी गई है। दिसंबर 2024 तक भारत में 2,20,414 लोग इस संक्रमण की चपेट में आ चुके थे, जिनमें से 347 की मृत्यु हो गई। अकेले दिल्ली में 3,141 मामले दर्ज किए गए हैं।

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स्वाइन फ्लू एक संक्रामक बीमारी है, जो H1N1 इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होती है। यह वायरस मूल रूप से सूअरों में पाया जाता था, लेकिन अब यह इंसानों में भी फैल रहा है। 2009 में इसने महामारी का रूप लिया था और तब से यह समय-समय पर फैलता रहता है। यह संक्रमण मुख्य रूप से खांसने, छींकने और संक्रमित सतहों को छूने से फैलता है।

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इस बीमारी के लक्षण सामान्य फ्लू की तरह होते हैं, लेकिन कई मामलों में यह गंभीर रूप ले सकता है। संक्रमित व्यक्ति को अचानक तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द, थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में उल्टी, दस्त और सांस लेने में कठिनाई भी देखी जाती है। गंभीर लक्षणों की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है।

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स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतनी चाहिए। हाथों की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए और समय-समय पर साबुन या सैनिटाइजर से हाथ धोने चाहिए। भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचना चाहिए और बाहर जाते समय मास्क पहनना जरूरी है। संक्रमित व्यक्ति से उचित दूरी बनाए रखना संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या रूमाल से ढकना चाहिए। इम्युनिटी मजबूत करने के लिए पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम और पूरी नींद लेना आवश्यक है। विटामिन-सी और डी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन संक्रमण से बचाव में मदद कर सकता है।

H1N1 वैक्सीन इस बीमारी से बचाव में कारगर है। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को यह टीका लगवाना चाहिए। यदि किसी को स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए और खुद से कोई दवा नहीं लेनी चाहिए।

स्वाइन फ्लू एक गंभीर संक्रमण है, लेकिन सही सावधानियां अपनाकर और समय पर इलाज लेकर इससे बचाव किया जा सकता है। बदलते मौसम में संक्रमण का खतरा अधिक होता है, इसलिए स्वच्छता बनाए रखना, प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना और चिकित्सा सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है। यदि आपके परिवार में किसी को इस बीमारी के लक्षण दिखें, तो जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता लें और संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए सतर्कता बरतें।

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